राजा परीक्षित और कलियुग की कथा
(धर्म, समय और मनुष्य के कर्तव्य का गहरा संदेश)महाभारत के महान योद्धा अर्जुन के पौत्र और वीर अभिमन्यु के पुत्र थे राजा परीक्षित। जब पांडव अपने जीवन का कार्य पूर्ण कर स्वर्गलोक को प्रस्थान कर गए, तब उन्होंने अपने राज्य का भार धर्मनिष्ठ
मानव शरीर की पाँच ज्ञानेंद्रियाँ और उनका आध्यात्मिक महत्व
By: Dr Avi Verma मानव शरीर प्रकृति और परमात्मा की अद्भुत रचना है। हमारे शरीर में पाँच प्रमुख ज्ञानेंद्रियाँ होती हैं—आँख, कान, नाक, जीभ और त्वचा। इनके माध्यम से हम संसार को देखते, सुनते, महसूस करते और समझते हैं। विज्ञान की दृष्टि से
हिन्दू धर्म में अंतिम संस्कार का महत्व
मृत्यु के बाद शीघ्र दाह संस्कार क्यों किया जाता है? मानव जीवन को सनातन धर्म में एक पवित्र यात्रा माना गया है, जो जन्म से शुरू होकर मृत्यु तक चलती है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार मनुष्य के जीवन में सोलह संस्कार बताए गए
King Parikshit and the Age of Kali: An Eternal Message on Dharma, Time, and Human Consciousness
In the Indian spiritual tradition, Puranic narratives are not merely religious stories; they serve as mirrors reflecting the profound psychological, moral, and social truths of human life. The story of King Parikshit belongs to this category. It teaches us that the preservation of
चौथा पड़ाव: नक्सा परवत मंदिर के खंडहर IndoUS Tribune की “मंदिरों की यात्रा” श्रृंखला का चौथा अध्याय
आंध्र प्रदेश के भव्य, प्राचीन और आस्था से परिपूर्ण मंदिरों की अत्यंत सफल और स्मरणीय यात्रा के उपरांत, IndoUS Tribune अब अपनी आध्यात्मिक खोज को भारत के सुदूर उत्तर-पूर्व की ओर विस्तार दे चुका है। दक्षिण भारत की दिव्य स्थापत्य परंपराओं और गहन
IndoUS Tribune की “Temples of Arunachal Yatra” का तीसरा पड़ाव: तारा तारिणी मंदिर
IndoUS Tribune की “Temples of Arunachal Yatra” का तीसरा पड़ाव हमें पूर्वोत्तर की सीमाओं से आगे भारत की शक्ति-परंपरा के एक और महान धाम तक ले आता है—ओडिशा के गंजाम जिले की कुमारी पहाड़ियों पर अवस्थित तारा तारिणी मंदिर। यह पावन शक्तिपीठ न
राजा परीक्षित और कलियुग: धर्म, समय और मानव चेतना का शाश्वत संदेश
भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में पुराण कथाएँ केवल धार्मिक आख्यान नहीं हैं, बल्कि मानव जीवन के गहन मनोवैज्ञानिक, नैतिक और सामाजिक सत्य को प्रकट करने वाले दर्पण हैं। राजा परीक्षित की कथा इसी श्रेणी में आती है। यह कथा हमें बताती है कि धर्म
Simple and comprehensive meaning of the Hanuman Chalisa
We all recite the Hanuman Chalisa. Since childhood, we have heard and spoken it, and many times it remains limited to mere memorization. But have we ever truly tried to understand what we are saying to Lord Hanuman, what we are asking for?
मालिनीथान मंदिर
IndoUS Tribune की Temples of Arunachal Yatra का दूसरा पड़ाव हमें अरुणाचल प्रदेश के लोअर सियांग जिले के लिकाबाली क्षेत्र में सियांग पहाड़ियों की तलहटी पर स्थित मालिनीथान मंदिर के प्राचीन अवशेषों तक ले आता है—एक ऐसा पावन स्थल जहाँ इतिहास, पुरातत्व और
हनुमान चालीसा का सरल और व्यापक अर्थ
हम सभी हनुमान चालीसा पढ़ते हैं। बचपन से इसे सुनते और बोलते आए हैं, इसलिए कई बार यह केवल रटने तक सीमित रह जाती है। लेकिन क्या हमने कभी सच में समझने की कोशिश की है कि हम हनुमान जी से क्या कह
आंध्र से अरुणाचल तक: आस्था की निरंतर यात्रा: IndoUS Tribune की “मंदिरों की यात्रा” श्रृंखला का नया अध्याय
आंध्र प्रदेश के भव्य, प्राचीन और आस्था से परिपूर्ण मंदिरों की एक अत्यंत सफल, भावनात्मक और स्मरणीय यात्रा के समापन के पश्चात्, IndoUS Tribune अब अपनी आध्यात्मिक खोज को भारत के सुदूर उत्तर-पूर्व की ओर विस्तार दे रहा है। दक्षिण भारत की दिव्य
आंध्र प्रदेश मंदिर यात्रा : अंतिम पड़ाव — सोमाराम (सोमेश्वर) मंदिर, भीमावरम
IndoUS Tribune की “यात्रा और दर्शन” श्रृंखला की आंध्र प्रदेश मंदिर यात्रा आज अपने पंद्रहवें और अंतिम पड़ाव पर पहुँचती है। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम से आरंभ हुई यह आध्यात्मिक यात्रा, आंध्र प्रदेश के विविध, प्राचीन और श्रद्धा से परिपूर्ण मंदिरों से गुजरते हुए
आंध्र प्रदेश मंदिर यात्रा चौदहवाँ पड़ाव – श्री वासवी कन्यका परमेश्वरी मंदिर, पेनुगोंडा (पश्चिम गोदावरी)
IndoUS Tribune की “Temples of Andhra Pradesh Yatra” में आपका एक बार फिर हार्दिक स्वागत है।अब जबकि हमारी यह आध्यात्मिक यात्रा अपने अंतिम चरण की ओर अग्रसर है, आज हम आपको ले चल रहे हैं आंध्र प्रदेश के एक ऐसे पवित्र तीर्थ स्थल
अतिथिदेवो भवः — भारतीय संस्कृति में अतिथि धर्म का सरल अर्थ
उपनिषद् का प्रसिद्ध वाक्य “अतिथिदेवो भवः” हमें यह सिखाता है कि अतिथि देवता के समान होता है। अतिथि की सेवा करना ईश्वर की पूजा के बराबर माना गया है। सूतजी के अनुसार अतिथि सत्कार से बड़ा कोई धर्म नहीं है और अतिथि से
आंध्र प्रदेश: 13वाँ पड़ाव – वोंटिमिट्टा कोदंदरमा मंदिर (कडपा)
IndoUS Tribune की “यात्रा और दर्शन” श्रृंखला में आपका पुनः स्वागत है! आंध्र प्रदेश के मंदिरों की आध्यात्मिक यात्रा में, तिरुमला वेंकटेश्वर मंदिर (तिरुपति) के दर्शन के बाद अब हम पहुँचते हैं कडपा जिले के प्रसिद्ध वोंटिमिट्टा कोदंदरमा मंदिर। यह मंदिर 16वीं सदी
Gita study – as I understand it, chapter 18: the yoga of liberation and renunciation (part 2)
By: Rajendra Kapil The second part of the eighteenth chapter begins with a discussion on the knowledge of caste and duty prevalent in society. In common Indian society, there is a belief that caste is hereditary. That is, a person’s caste is determined
आंध्रप्रदेश: 12वाँ पड़ाव – लेपक्षी मंदिर (वीरभद्र मंदिर, अनंतपुर)
IndoUS Tribune की “यात्रा और दर्शन” श्रृंखला में आपका पुनः स्वागत है! भारत के मंदिरों की इस आध्यात्मिक यात्रा के पहले 11 पड़ावों में हमने कई पवित्र स्थलों और उनकी अद्भुत कथाओं का दर्शन किया। अब हम पहुँच चुके हैं आंध्र प्रदेश के
गीता स्वाध्याय- मेरी समझ से, अठारहवाँ अध्याय- मोक्ष संन्यास योग (भाग 2)
By: Rajendra Kapil अठारहवें अध्याय का दूसरा भाग समाज में विद्यमान जाति धर्म ज्ञान से आरंभ होता है. भारत के आम समाज में यह धारणा है कि, जातिवाद वंशगत है. अर्थात् जो जिस वंश में पैदा हुआ है, उसकी जाति भी वही होगी. ब्राह्मण
आंध्र प्रदेश: ग्यारहवां पड़ाव – श्री कुर्मम मंदिर (Srikakulam)
IndoUS Tribune की “यात्रा और दर्शन” श्रृंखला में आपका पुनः स्वागत है! हमारे पिछले पड़ावों में तिरुमला वेंकटेश्वर और श्रीकालहस्ती मंदिरों के दिव्य दर्शन कर आप आध्यात्मिक अनुभव से भर चुके हैं। अब हम आगे बढ़ रहे हैं आंध्र प्रदेश के श्रीकुर्मम मंदिर
Gita Swadhyay – My understanding, chapter 18: Moksha Sannyasa Yoga (Part 1)
Dear Readers, We have now reached the final chapter of the Bhagavad Gita, known as the Moksha Sannyasa Yoga. This chapter encapsulates the essence of the entire Gita, providing the fullest possibility of liberation (moksha). To aid comprehension, this chapter has been divided