Kevat – Bhagwan Ram, Meri Naiya Paar Karo
By: Rajender Kapil The character of Kevat in the Ramayana is one of innocence and devotion. When we think of Kevat, an image comes to mind of him sitting at Lord Ram’s feet, washing them with great reverence, and then drinking that sacred
IndoUS Tribune की हरिद्वार के मंदिरों की यात्रा का चौथा पड़ाव: माया देवी मंदिर
हरिद्वार, जिसे ‘धर्म द्वार’ कहा जाता है, हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र स्थानों में से एक है। यहां स्थित माया देवीमंदिर न केवल श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है, बल्कि इसे हरिद्वार की अधिष्ठात्री देवी का सम्मानभी प्राप्त है। IndoUS Tribune
Unity, harmony, and spirituality: The sacred expression of Maha Kumbh 2025
By: Satyaprakash Dwivedi The grand and divine Maha Kumbh 2025 in Prayagraj witnessed a historic moment as the Honorable President of India, Smt. Droupadi Murmu, along with the Honorable Chief Minister of Uttar Pradesh, Yogi Adityanath Ji, and their families, took a holy dip in the sacred Triveni Sangam—the confluence of the
Honorable Chief minister of Haryana, Nayab Singh Saini, takes a holy dip at Triveni Sangam during Maha Kumbh 2025
By: Satyaprakash Dwivedi The Honorable Chief Minister of Haryana, Nayab Singh Saini, along with his family, participated in the sacred Maha Kumbh 2025 in Prayagraj by taking a holy dip in the revered Triveni Sangam, the confluence of the three divine rivers—Maa Ganga, Maa Yamuna, and Maa Saraswati. Following the purifying
Union Home and Home Minister Amit Shah, Along with Chief Minister Yogi Adityanath and Revered Saints, Takes a Sacred Dip at Maha Kumbh 2025
By: Satyaprakash Dwivedi India’s Honorable Union Home and Cooperation Minister, Shri Amit Shah, accompanied by his family, Uttar Pradesh’s Honorable Chief Minister, Shri Yogi Adityanath, and several revered saints, participated in the world’s largest spiritual congregation, the Maha Kumbh 2025 in Prayagraj. As a mark of deep faith and devotion,
हरिद्वार के मंदिरों की यात्रा का तीसरा पड़ाव: हर की पौड़ी
हरिद्वार, जिसे ‘धर्म द्वार’ कहा जाता है, हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र स्थानों में से एक है। यहां बहने वाली मां गंगा न केवल आस्था का प्रतीक हैं, बल्कि मोक्ष प्राप्ति का द्वार भी मानी जाती हैं। IndoUS Tribune की हरिद्वार के मंदिरों
केवट – मेरी नैया पार करो मेरे राम
By: Rajendra Kapil रामायण का पात्र केवट, एक ऐसा चरित्र, जिसकी छवि बड़ी भोली है. केवट का ध्यान आते ही एक ऐसा चित्र सामने आ जाता है, जो रामजी के चरणों में बैठा, रामजी के पग पखार रहा है. और उस चरणामृत को पीकर अपने आप को धन्य धन्य अनुभव कर रहा है. रामजी को जब वनवास की आज्ञा सुनाई गई, तो वह संन्यासी वेष में, लक्ष्मण और सिया संग, वनों की ओर निकल पड़े. उनके साथ पूरी अयोध्या भी साथ हो चली. जहाँ जहाँ प्रभु रुकते, प्रजा भी वहाँ पड़ाव डाल लेती. ऐसा करते प्रभु गंगा के किनारे आ पहुँचे. साथ आये सुमंत्र काका से सलाह कर, उन्होंने निर्णय लिया कि, चुपचाप गंगा पार कर प्रजा से विलग हो जाते हैं. ताकि प्रजा अपने अपने घरों में लौट कर, अपनी दिनचर्या में पुन: व्यस्त हो सके. लेकिन प्रश्न यह था कि, गंगा पार कराए कौन? यहीं केवट का प्रवेश राम रामायण में होता है. एक साधारण सा नौका चालक, जो दिन भर चप्पू चला अपनी जीविका कमा रहा था. प्रभु को जब उसके बारे में पता चला तो उसे बुला भेजा. केवट आ गया. प्रभु ने पार जाने की विनती की. मागी नाव न केवटु आना, कहइ तुम्हार मरमु मैं जाना केवट को रामजी के बारे में कुछ जानकारी पहले से थी. उसने रामजी और उनके द्वारा, अहिल्या उद्धार की कथा सुन रखी थी. उसने सुन रखा था कि, जैसे ही रामजी की चरण धूलि ने शिलावत् अहिल्या को छुआ, तो वह एक स्त्री के रूप में परिवर्तित हो गई थी. चरन कमल रज कहुँ सबु कहई, मानुष करनि मूरि कछु अहई आपके चरणों की धूलि के बारे सभी ने मुझे यह बता रखा है कि, उसमें एक जादू है, जो अगर पत्थर को भी छू ले तो उसे स्त्री बना देती है. छुअत सिला भइ नारि सुहाई, पाहन तें न काठ कठिनाई एहि प्रतिपालऊँ सबु परिवारु, नहीं जानऊँ कछु अउर कबारू प्रभु, आपकी चरण धूलि छूते ही एक शिला एक सुंदर नारी बन गई थी, और मेरी नाव तो केवल लकड़ी की है. पत्थर की तुलना में लकड़ी पत्थर से कहीं अधिक कोमल है. अगर मेरी नौका कुछ और बन गई तो, मेरी तो जीविका ही जाती रहेगी. फिर यह ग़रीब नाविक अपने परिवार का पेट कैसे पाल पायेगा? मैं तो इसी नौका की मजूरी से परिवार पालता हूँ. मुझे कोई और दूसरा धंधा भी नहीं आता. लेकिन आपने कहा है तो, मैं आपकी सहायता अवश्य करूँगा. आपको निराश नहीं करूँगा. मेरी आपसे एक बिनती है, यदि आप मान लें तो हम दोनों का काम आसानी से हो सकता है. प्रभु ने बोला, बताओ मैं सुनने को तैयार हूँ. तब केवट बोला: जौं प्रभु पार अवसि गा चहहू, मोहि पद पदुम पखारन क़हहू अगर आप पार उतरना चाहते तो मुझे आप अपने चरण धोने की आज्ञा दीजिए. मैं आपके चरणों का चरणामृत पान कर आश्वस्त होना चाहता हूँ कि, मेरी नाव को कुछ नहीं होगा. इसके बाद मैं आपको ख़ुशी ख़ुशी गंगा पार करवा दूँगा. प्रभु केवट की भोली भोली बातें सुन मुस्कुराने लगे, और बोले केवट वही करो जिससे तुम्हारा कोई नुक़सान न हो. फिर क्या था, केवट भाग कर जल से भरा एक कठोता ले आया, और प्रभु के पग पखारने लगा. पद कमल धोइ चढ़ाइ नाव न नाथ उतराई चहों मोहि राम राउरि आन दसरथ सपथ सब साँची कहों बरु तीर मारहुँ लखनु पै जब लगि न पाय पखारिहों तब लगि न तुलसीदास नाथ कृपाल पारू उतारिहों तुलसी बाबा ने इस वार्तालाप को बड़े सुंदर ढंग से छंदबंध किया. केवट बोला, प्रभु मैं आपसे उतराई भी नहीं लूँगा. अगर आपको मंज़ूर न हो तो, फिर चाहे लखन लाल मुझे अपने तीर से घायल भी कर दें तो भी, मैं आपको पार नहीं उंतराऊँगा. प्रभु केवट की अटपटी बातों का आनंद ले रहें हैं. सुनि केवट के बैन प्रेम लपेटे अटपटे बिहसे करुनाऐन चितइ जानकी लखन तन केवट के प्रेम एवं भक्ति से परिपूर्ण, ऐसे अटपटे बचन सुन रामजी, सीता और लखन की ओर देख मुस्कुराने लगे. मानो पूछ रहे हो कि, मैं अपने इस भक्त का क्या करूँ? तुलसी बाबा इस मधुर दृश्य को देख गद गद हो कह उठे: जासु नाम सुमिरत एक बारा, उतरहि नर भवसिंधु अपारा सोइ कृपालु केवटहि निहोरा, जेहि जगु किय तिहु पगहु ते थोरा वह रामजी जिनके नाम सिमरन से भक्त
The First Meeting of Ram and Sita
By: Rajender Kapil The story of the first meeting between Ram and Sita is described in the Bal Kand of Ramcharitmanas. When King Janak decided on Sita’s Swayamvar, he sent invitations to all the great kings of the land, including even Ravan, the King of
हरिद्वार मंदिर यात्रा श्रृंखला: दूसरी यात्रा – श्री चंडी देवी मंदिर
इंडोयूएस ट्रिब्यून के धर्म कर्म अनुभाग में हम आपके लिए लेकर आए हैं हरिद्वार मंदिर यात्रा की एक विशेषश्रृंखला। इस श्रृंखला में हम आपको हरिद्वार के प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन कराएंगे। हरिद्वार, जिसे देवभूमि काप्रवेश द्वार माना जाता है, आध्यात्मिकता, भक्ति और
राम सिया का प्रथम मिलन
By: Rajendra Kapilराम सिया के प्रथम मिलन की कथा राम चरित मानस के बालकाण्ड में आती है.जब राजा जनक ने सीता स्वयंवर के बारे में निश्चय किया, तो उस समय उन्होंने देश के सभी बड़े बड़े राजाओं को निमंत्रण भेजा. यहाँ तक कि,
हरिद्वार मंदिर यात्रा श्रृंखला की प्रथम कड़ी : मां मनसा देवी
इंडोयूएस ट्रिब्यून के धर्म कर्म अनुभाग में हम आपके लिए लेकर आए हैं हरिद्वार मंदिर यात्रा की एक विशेषश्रृंखला, जिसमें हम आपको हरिद्वार के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के दर्शन कराएंगे। इस पवित्र नगरी को देवभूमि काप्रवेश द्वार माना जाता है, जहाँ अध्यात्म, भक्ति
हरिद्वार: गंगा की गोद में बसी आध्यात्मिक नगरी
हरिद्वार—जहां गंगा की पावन धारा बहकर मानव जीवन को मोक्ष के पथ पर अग्रसर करती है। यह मात्र एक तीर्थस्थल नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक साधना और दिव्यता का केंद्र है। भारत की धार्मिक धरोहर में हरिद्वार का स्थान अत्यंत विशिष्ट और पूजनीय
Ram Raksha Stotra – A powerful shield of protection
By: Rajendra Kapil In the Ram Raksha Stotra, Sage Budh Kaushik offers his devotion to Lord Ram in a unique manner. With complete surrender, he prays to Lord Ram for protection in every possible way. This heartfelt prayer consists of approximately 38 verses, seeking
Devotees take holy dip at Triveni Sangam on 30th day of Maha Kumbh, praise facilities
On the 30th day of the Maha Kumbh, thousands of devotees gathered at the sacred Triveni Sangam in Prayagraj to take a holy dip, seeking spiritual purification and divine blessings. The pilgrimage site witnessed an overwhelming yet orderly crowd as devotees performed pujas,
राम रक्षा स्तोत्र – सुरक्षा का शक्तिशाली कवच
By: Rajendra Kapilराम रक्षा स्तोत्र में ऋषि बुध कौशिक ने रामजी की आराधना एक अलग ढंग से की है. ऋषिकौशिक ने रामजी के सम्मुख पूर्ण समर्पण करते हुए, उनसे प्रार्थना की, कि प्रभु उनकी हर प्रकारसे रक्षा करें. इसी प्रार्थना के अन्तर्गत उन्होंने
भारतीय हिंदू समुदाय में उल्लास के साथ मनाया गया बसंत पंचमी पर्व
बसंत पंचमी का पर्व हिंदू समुदाय के लिए विशेष आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है। माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाने वाला यह उत्सव ज्ञान, कला, और वाणी की देवी माता सरस्वती को समर्पित है। इस दिन लोग विशेष रूप से पीले वस्त्र धारण करते हैं, मां सरस्वती की आराधना करते हैं और विद्या, बुद्धि तथा संगीत में उन्नति की प्रार्थना करते हैं। बसंत पंचमी और माता सरस्वती की उत्पत्ति की कथा बसंत पंचमी को देवी सरस्वती का प्राकट्य दिवस माना जाता है। इस दिन उनकी कथा पढ़ने और सुनने से विशेष आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है। ब्रह्मवैवर्त पुराण और मत्स्य पुराण के अनुसार देवी सरस्वती का प्राकट्य सृष्टि के आरंभ में जब ब्रह्मा जी ने संसार का अवलोकन किया, तो उन्होंने देखा कि सभी जीव मौन और नीरस थे। यह देखकर उन्होंने भगवान विष्णु और भगवान शिव से अनुमति लेकर अपने कमंडल का जल वेद मंत्रों के साथ पृथ्वी पर छिड़का। तभी एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई, जिनके चार हाथों में वीणा, पुस्तक, माला और वर मुद्रा थी। ब्रह्मा जी ने उन्हें सरस्वती नाम दिया और उनसे संसार में ज्ञान, संगीत और वाणी का संचार करने का अनुरोध किया। माता सरस्वती ने वीणा का मधुर नाद किया, जिससे संपूर्ण ब्रह्मांड में जीवन का संचार हुआ। इस प्रकार, देवी सरस्वती को विद्या, बुद्धि और संगीत की अधिष्ठात्री देवी माना गया। श्रीकृष्ण का वरदान (पौराणिक कथा) एक अन्य कथा के अनुसार, माता सरस्वती भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में पाना चाहती थीं। लेकिन श्रीकृष्ण ने स्पष्ट किया कि वे केवल राधारानी के प्रति समर्पित हैं। फिर भी, माता सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए उन्होंने वरदान दिया कि माघ शुक्ल पंचमी को समस्त संसार उनकी पूजा करेगा और वे विद्या एवं ज्ञान की देवी के रूप में पूजी जाएंगी। इसी दिन से बसंत पंचमी पर सरस्वती माता की आराधना की जाने लगी। देवी भागवत पुराण के अनुसार माता सरस्वती की उत्पत्ति त्रिदेव—ब्रह्मा, विष्णु और महेश—ने जब सृष्टि की रचना की, तो उन्होंने पाया कि संसार में शांति है, लेकिन उत्साह और आनंद की कमी है। तब ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का और वेद मंत्रों का उच्चारण किया। जल छिड़कते ही एक दिव्य देवी प्रकट हुईं, जिनके हाथों में वीणा, पुस्तक, माला और तथास्तु मुद्रा थी। त्रिदेवों ने माता सरस्वती का अभिवादन किया और उनसे वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही माता सरस्वती ने वीणा बजाई, पूरे ब्रह्मांड में मधुर ध्वनि गूंज उठी। नदियां कलकल बहने लगीं, पक्षी चहकने लगे, और सम्पूर्ण सृष्टि में आनंद छा गया। बसंत पंचमी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बसंत पंचमी के दिन प्रमुख अनुष्ठान और परंपराएं उपसंहार बसंत पंचमी का पर्व हमें ज्ञान, संगीत और कला के महत्व को समझने और माता सरस्वती की कृपा प्राप्त करने का सुअवसर देता है। यह उत्सव न केवल आध्यात्मिक चेतना को जागृत करता है, बल्कि जीवन में उल्लास, उत्साह और नई ऊर्जा का संचार करता है। भारतीय हिंदू समुदाय में इस पर्व को अत्यंत श्रद्धा और उमंग के साथ मनाया जाता है, जिससे समाज में विद्या, संस्कृति और आध्यात्मिकता की ज्योति प्रज्ज्वलित होती रहती है।
The new generation of the Raghukul dynasty: Luv, Kush, and their brothers
By: Rajendra KapilAfter returning to Ayodhya from exile, Shri Ram devoted himself to both his royal duties and his family life. Everything was progressing harmoniously until one day, an incident sparked widespread controversy. A washerman, furious with his wife for spending a night
गुप्त नवरात्रि: एक रहस्यमयी और शक्तिशाली उपासना काल
हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है। यह पर्व वर्ष में चार बार मनाया जाता है—दो प्रत्यक्ष (चैत्र और शारदीय) और दो गुप्त (माघ और आषाढ़)। चैत्र और शारदीय नवरात्रि व्यापक रूप से मनाए जाते हैं, जबकि गुप्त नवरात्रि मुख्य रूप से साधकों, तांत्रिकों और गुप्त साधनाओं में रुचि रखने वाले भक्तों के लिए होती हैं। गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से तांत्रिक और आध्यात्मिक साधनाओं के लिए जानी जाती हैं। इनमें देवी दुर्गा के दस महाविद्याओं की उपासना की जाती है, जो साधक को सिद्धियों और आंतरिक शक्ति की प्राप्ति का मार्ग दिखाती हैं। माघ गुप्त नवरात्रि: शुभ तिथियां माघ मास की गुप्त नवरात्रि 30 जनवरी से 7 फरवरी 2025 तक चलेगी। इस दौरान साधक विशेष रूप से माता के गुप्त स्वरूपों की आराधना करते हैं और अपनी साधना को पूर्ण करने का प्रयास करते हैं। गुप्त नवरात्रि की महत्ता गुप्त नवरात्रि के दौरान की गई पूजा और साधना अत्यंत फलदायी मानी जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त सच्चे मन से माता की आराधना करते हैं, उन्हें विशेष सिद्धियां प्राप्त होती हैं और उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस दौरान देवी के दस महाविद्याओं—काली, तारा, छिन्नमस्ता, भुवनेश्वरी, बगलामुखी, धूमावती, त्रिपुर सुंदरी, मातंगी, षोड़शी और भैरवी—की उपासना की जाती है। माना जाता है कि इन महाविद्याओं की साधना से साधक को दिव्य ज्ञान और आत्मबल प्राप्त होता है। गुप्त नवरात्रि की पौराणिक कथा पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब राजा दक्ष ने एक भव्य यज्ञ का आयोजन किया, तब उन्होंने अपनी पुत्री सती और उनके पति भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया। सती इस बात से व्यथित हो गईं और भगवान शिव से यज्ञ में जाने की जिद करने लगीं। जब शिवजी ने मना किया, तब सती ने अपने दस महाविद्याओं का प्रदर्शन किया। भगवान शिव ने आश्चर्यचकित होकर पूछा कि ये कौन हैं? तब सती ने उत्तर दिया: इन्हीं महाविद्याओं की साधना गुप्त नवरात्रि में विशेष रूप से की जाती है, जिससे साधक को अपार शक्ति और सिद्धियां प्राप्त होती हैं। गुप्त नवरात्रि की पूजा विधि 1. घटस्थापना (कलश स्थापना) गुप्त नवरात्रि के पहले दिन प्रतिपदा तिथि को सूर्योदय के बाद और सूर्यास्त से पूर्व शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना की जाती है। इसके लिए निम्न विधि अपनाई जाती है: 2. देवी की पूजा 3. विशेष साधनाएं और मंत्र जप गुप्त नवरात्रि में कई साधक तांत्रिक साधनाएं करते हैं। इन दिनों दुर्गा बीज मंत्र, महाविद्याओं के मंत्र और गायत्री महामंत्र का जाप विशेष फलदायी माना जाता है। गुप्त नवरात्रि के दौरान जपे जाने वाले प्रमुख मंत्र: गुप्त नवरात्रि का आध्यात्मिक लाभ गुप्त नवरात्रि के दौरान की गई पूजा और साधना से व्यक्ति को विशेष आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। यह समय आत्मशुद्धि और साधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। जिन लोगों को जीवन में परेशानियां, बाधाएं और कष्टों का सामना करना पड़ रहा है, वे गुप्त नवरात्रि में विशेष पूजा कर इनसे मुक्ति पा सकते हैं। निष्कर्ष गुप्त नवरात्रि केवल साधकों के लिए ही नहीं, बल्कि उन सभी भक्तों के लिए महत्वपूर्ण है जो मां भगवती की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं। यह समय अपने भीतर छिपी शक्तियों को जागृत करने और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने का सुनहरा अवसर होता है। तो इस गुप्त नवरात्रि पर, माता के गुप्त रूपों की साधना करें और अपने जीवन को आध्यात्मिक ऊंचाइयों तक पहुंचाएं.
Huge influx of devotees in Ayodhya on Mauni Amavasya; over 50 lakh pilgrims visit holy city in 72 hours
While lakhs of pilgrims flock to Prayagraj for the ‘Mauni Amavasya snan’, the holy city of Ayodhya also witnessed an overwhelming surge of devotees on the auspicious occasion. In the early morning, devotees took a holy dip in the Saryu River in silence
Four women from Bihar’s Gopalganj killed in Mahakumbh stampede
Four women from Bihar’s Gopalganj district lost their lives in a stampede during the Mahakumbh Mela in Prayagraj. The commotion had broken out in the early hours of Wednesday. The incident occurred at Sangam Ghat during the Mauni Amavasya bath (holy bath), one