आंध्रप्रदेश: 12वाँ पड़ाव – लेपक्षी मंदिर (वीरभद्र मंदिर, अनंतपुर)

आंध्रप्रदेश: 12वाँ पड़ाव – लेपक्षी मंदिर (वीरभद्र मंदिर, अनंतपुर)

IndoUS Tribune की यात्रा और दर्शन श्रृंखला में आपका पुनः स्वागत है! भारत के मंदिरों की इस आध्यात्मिक यात्रा के पहले 11 पड़ावों में हमने कई पवित्र स्थलों और उनकी अद्भुत कथाओं का दर्शन किया। अब हम पहुँच चुके हैं आंध्र प्रदेश के लेपक्षी मंदिर में — एक ऐसा मंदिर जो विजयनगर स्थापत्य, भव्य भित्ति चित्रों और प्राचीन कथाओं का अनुपम संगम प्रस्तुत करता है।

इस श्रृंखला के प्रथम पड़ाव में हम दर्शन करेंगे तिरुमला वेंकटेश्वर मंदिर (तिरुपति) के — जहाँ भगवान श्री वेंकटेश्वर (श्री बालाजी) की दिव्य उपस्थिति हर भक्त के हृदय को भक्ति और समर्पण से भर देती है।

लेपक्षी मंदिर (वीरभद्र मंदिर), अनंतपुर

आंध्र प्रदेश की इस यात्रा का अगला पड़ाव है लेपक्षी मंदिर, जो अनंतपुर जिले में स्थित है। यह 16वीं सदी का विजयनगर साम्राज्य का स्थापत्य चमत्कार है, जो अपनी लटकती स्तंभ, विशाल नंदी, बारीक नक्काशी और जीवंत भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध है।

किंवदंतियाँ और पौराणिक कथाएँ

  • जटायु का पतन: रामायण के अनुसार, जटायु ने रावण के हाथों सीता का अपहरण रोकने का प्रयास किया। युद्ध में घायल जटायु लेपक्षी में गिरा और भगवान राम ने कहा ले पक्षी” (उठो, पक्षी)। इसी घटना से इस स्थान का नाम “लेपक्षी” पड़ा।
  • अंधा कोषाध्यक्ष (लापेआक्षि): एक अन्य कथा कहती है कि कोषाध्यक्ष विरुपन्ना को राजा ने अंधा कर दिया। उन्होंने अपनी आंखें दीवार पर फेंक दीं, जिसके लाल निशान आज भी देखे जा सकते हैं।
  • सीता का पदचिह्न: मंदिर परिसर में एक विशाल पदचिह्न है, जिसे सीता या हनुमान का माना जाता है। यह हमेशा गीला रहता है, क्योंकि नीचे से लगातार पानी रिसता रहता है।

इतिहास और वास्तुकला

  • निर्माता: 1530 के दशक में विरुपन्ना और विरन्ना ने विजयनगर साम्राज्य के अधीन इस मंदिर का निर्माण कराया।
  • समर्पण: यह मंदिर भगवान वीरभद्र (शिव का प्रचंड रूप) को समर्पित है।
  • स्थापत्य चमत्कार:
    • लटकती स्तंभ: छत से लटकता हुआ स्तंभ, जो जमीन को नहीं छूता।
    • एकीकृत नंदी: विशाल, एक-पथरी का नंदी।
    • भित्ति चित्र और मूर्तियाँ: रंगीन भित्ति चित्र और बहु-मुखीय नागलिंग जैसी जटिल मूर्तियाँ।

महत्व

  • यह विजयनगर स्थापत्य का उत्कृष्ट नमूना है।
  • कला और इंजीनियरिंग का अद्भुत मिश्रण दर्शाता है।
  • कन्नड़ लिपि में उत्कीर्ण अनेक शिलालेख।
  • यूनेस्को के संभावित विश्व धरोहर स्थल में शामिल।

समापन

लेपक्षी मंदिर के दर्शन हमारे आंध्र प्रदेश यात्रा के इस पड़ाव का महत्व दर्शाते हैं। यह मंदिर न केवल धार्मिक भक्ति का केंद्र है, बल्कि भारतीय कला, स्थापत्य और इतिहास की अनमोल धरोहर भी प्रस्तुत करता है।

IndoUS Tribune की ओर से हम आशा करते हैं कि इस श्रृंखला के माध्यम से आप भी इस दिव्य यात्रा का हिस्सा बनेंगे और भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपराओं का अनुभव करेंगे।

हमारे अगले पड़ाव में हम पहुँचेंगे वोंटिमित्ता कोडंदरामा मंदिर (कडापा) — जहाँ भगवान राम के दिव्य रूप की भक्ति और आस्था का अद्भुत केंद्र है।भगवान वेंकटेश्वर और वीरभद्र की कृपा और आशीर्वाद आपके जीवन में सुखसमृद्धि और शांति लेकर आएयही शुभकामना।

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