
आंध्र प्रदेश: 13वाँ पड़ाव – वोंटिमिट्टा कोदंदरमा मंदिर (कडपा)
IndoUS Tribune की “यात्रा और दर्शन” श्रृंखला में आपका पुनः स्वागत है! आंध्र प्रदेश के मंदिरों की आध्यात्मिक यात्रा में, तिरुमला वेंकटेश्वर मंदिर (तिरुपति) के दर्शन के बाद अब हम पहुँचते हैं कडपा जिले के प्रसिद्ध वोंटिमिट्टा कोदंदरमा मंदिर। यह मंदिर 16वीं सदी के विजयनगर युग का अद्वितीय उदाहरण है और अपनी भव्य वास्तुकला तथा अनोखी मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ भगवान श्री राम, सीता और लक्ष्मण की एकल-शिला मूर्तियाँ हैं, और रोचक बात यह है कि हनुमान की प्रतिमा यहाँ नहीं है, ऐसा माना जाता है कि इस समय तक हनुमान ने राम से भेंट नहीं की थी।
इतिहास और वास्तुकला:
वोंटिमिट्टा कोदंदरमा मंदिर का निर्माण चोल और विजयनगर शासकों के काल में हुआ था, और इसमें विजयनगर शैली की झलक मिलती है। यह मंदिर द्रविड़ीय वास्तुकला का शानदार उदाहरण है, जिसमें intricately carved मंडप (हॉल) और स्तंभ हैं। केंद्रीय मंडप, जिसे मद्ध्यारंगमंडपम भी कहा जाता है, 32 स्तंभों पर आधारित है और प्रत्येक स्तंभ पर देवी-देवताओं और अप्सराओं की मूर्तियाँ अंकित हैं। केंद्र स्तंभ पर श्री राम और लक्ष्मण की मूर्तियाँ त्रिभंग मुद्रा में अंकित हैं।
कथाएँ और महत्ता:
स्थानीय मान्यता है कि दो डाकू, वोंटुडु और मित्तुडु, जिन्होंने राम के दर्शन के पश्चात भक्ति अपनाई, इसी मंदिर का निर्माण किया। कहा जाता है कि निर्माण के पश्चात् ये दोनों पत्थर में बदल गए। मंदिर कोदंदरमा (धनुषधारी राम) के रूप में पूजा जाता है। प्रसिद्ध कवि बम्मेरा पोथना, जिन्होंने तेलुगु में श्रीमद्भागवतम लिखा, यहीं निवास करते थे। संत-श्री अन्नामाचार्य भी यहाँ आए और राम की स्तुति में कीर्तन किए।
पूजा और त्यौहार:
मुख्य उत्सव श्री राम नवमी है। यह एक प्रमुख तीर्थ स्थल है और वर्तमान में तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के प्रशासन में है। मंदिर परिसर में राम थीर्थम और लक्ष्मण थीर्थम नामक दो पवित्र जलाशय स्थित हैं।
आध्यात्मिक महत्व:
कोंदंदरमा मंदिर की अद्वितीय मूर्तियाँ, भव्य मंडप और ऐतिहासिक महत्व इसे आंध्र प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में स्थान दिलाते हैं। यहाँ आने वाले भक्तों को न केवल भक्ति का अनुभव मिलता है, बल्कि विजयनगर युग की वास्तुकला और सांस्कृतिक विरासत का भी सजीव दर्शन होता है।
समापन:
वोंटिमिट्टा कोदंदरमा मंदिर के दर्शन आंध्र प्रदेश यात्रा का 13वाँ पड़ाव है — एक ऐसा स्थल जो हमें भारतीय संस्कृति, भक्ति परंपरा और प्राचीन मंदिर स्थापत्य से जोड़ता है। IndoUS Tribune की ओर से हम आशा करते हैं कि इस श्रृंखला के माध्यम से आप भी इस दिव्य यात्रा का हिस्सा बनेंगे और आध्यात्मिक अनुभव का आनंद लेंगे।
हमारे अगले पड़ाव में हम पहुँचेंगे पेनुगोंडा वासवी कन्यका परमेश्वरी मंदिर (वेस्ट गोदावरी) — जहाँ माँ वासवी कन्यका की भक्ति और चमत्कारिक कथाएँ भक्तों के हृदय को भक्ति और श्रद्धा से भर देंगी। तब तक के लिए, वोंटिमिट्टा कोदंदरमा मंदिर की कृपा और आशीर्वाद आपके जीवन में सुख-समृद्धि और शांति लेकर आए — यही शुभकामना।