
आंध्र प्रदेश यात्रा – छठा पड़ाव: महानंदीश्वर मंदिर (नांदयाल)
आंध्र प्रदेश के पवित्र मंदिरों की हमारी यात्रा निरंतर आगे बढ़ रही है। IndoUS Tribune की “यात्रा और दर्शन” श्रृंखला में आपका स्वागत है — जहाँ हम आपको भारत की उन दिव्य धरोहरों से परिचित करा रहे हैं जो केवल आस्था ही नहीं, बल्कि कला, इतिहास और आध्यात्मिक विरासत का जीता-जागता प्रतीक हैं।
तिरुमला, श्रीकालहस्ती, विजयवाड़ा, अहोबिलम और मन्तपल्ले मंदिरों के दर्शन के बाद अब हम पहुँच रहे हैं अपने छठे पड़ाव – पवित्र महानंदीश्वर मंदिर (नांदयाल) में। नल्लमाला पर्वतमाला की गोद में स्थित यह दिव्य मंदिर न केवल भगवान शिव का प्राचीन स्वरूप प्रस्तुत करता है, बल्कि अपने अद्भुत जल-स्रोतों और शांत वातावरण से भक्तों को आत्मिक शांति प्रदान करता है।
महानंदीश्वर मंदिर (Mahanandi Temple, Andhra Pradesh)
भारत के सबसे प्राचीन शिवालयों में से एक, महानंदीश्वर मंदिर लगभग 1,500 वर्ष पुराना मंदिर है, जो भगवान शिव के स्वरूप “महानंदीश्वर” को समर्पित है। यह मंदिर नव–नंदी यात्रा (Nava Nandi Darshan Yatra) का महत्वपूर्ण हिस्सा है और नौ नंदी मंदिरों में सबसे प्रमुख माना जाता है।
नंदायल जिले के हरे-भरे जंगलों और नल्लमाला पहाड़ियों से घिरा यह मंदिर अपनी शांति, प्राकृतिक सौंदर्य और दिव्य जल-कुंडों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।
मुख्य विशेषताएँ
1. प्राचीनता और धार्मिक महत्त्व
यह मंदिर लगभग 1,500 वर्ष पुराना है, जिसका उल्लेख 10वीं शताब्दी की शिलालेखों में मिलता है।
महानंदी “नव–नंदुलु” (Nava Nandis) — महानंदी, शिवानंदी, विनायकानंदी, सोमनंदी, प्रथम-नंदी, गरुड़ानंदी, सूर्यनंदी, कृष्णानंदी (विष्णुनंदी) और नागानंदी — का पहला और सबसे प्रतिष्ठित केंद्र है।
शिव भक्तों का मानना है कि यह क्षेत्र प्राचीन नंदा वंश द्वारा शासित था, जिन्होंने नंदी के प्रति अत्यंत भक्ति के चलते अनेक मंदिरों का निर्माण करवाया।
2. दिव्य जल–स्रोत और पवित्र कुंड
महानंदीश्वर मंदिर का सबसे अद्भुत और अनोखा आकर्षण है —
इसके प्राकृतिक, शुद्ध और कभी न सूखने वाले जल–स्रोत, जिनसे बने पवित्र कुंड जिन्हें स्थानीय भाषा में Kalyani या Pushkarni कहा जाता है।
विशेषताएँ:
- मुख्य कुंड 60 वर्ग फीट का है, जिसके मध्य में एक मंडप स्थित है।
- कुंड का जल साल भर एक समान स्तर पर रहता है — चाहे मौसम कोई भी हो।
- यह पानी उष्ण (गर्म) और शीतल दोनों रूपों में तापमान के अनुसार अपना स्वरूप बदल लेता है।
- इस जल को औषधीय और उपचारक माना जाता है।
- विशेष रूप से — गरभगृह के पास स्थित जल–स्रोत भक्तों को सीधे शिवलिंग के निकट स्पर्श करने का दिव्य अवसर प्रदान करता है, जो किसी भी शिव मंदिर में अत्यंत दुर्लभ है।
3. विशिष्ट और बहु–स्तरीय वास्तुकला
मंदिर की अद्भुत वास्तुकला में विभिन्न युगों के राजवंशों की कला झलकती है:
- 7वीं शताब्दी – बादामी चालुक्य काल में मूल निर्माण
- 10वीं शताब्दी – प्राचीन नंदा राजाओं द्वारा विस्तार
- 15वीं शताब्दी – विजयनगर साम्राज्य की भव्यता का समावेश
वास्तुकला की विशेषताएँ:
- गर्भगृह का गोपुरम बादामी चालुक्य शैली में
- बाहरी मंडप एवं प्राकार विजयनगर शैली के
- पत्थरों पर की गई नंदी, शिव तथा पौराणिक आकृतियों की उत्कृष्ट शिल्पकला
- मंदिर क्षेत्र में तीन प्रमुख कुंड, जिनमें से अंतिम कुंड में स्नान शाम 5 बजे के बाद निषिद्ध है
अन्य महत्वपूर्ण जानकारी
- स्थान: नंदायल जिले से लगभग 14–21 किलोमीटर दूरी पर
- पर्व: महाशिवरात्रि का भव्य उत्सव फरवरी–मार्च में हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है
- यात्रा सुविधा:
- निकटतम रेलवे स्टेशन – Nandyal
- निकटतम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा – Hyderabad (215 km)
- आवास: होटल, लॉज और AP Tourism Haritha Hotel उपलब्ध
- बेहतर समय: नवंबर से मार्च
समापन परिचय
महानंदीश्वर मंदिर की यह आध्यात्मिक यात्रा हमें आंध्र प्रदेश की प्राचीन शिव-भक्ति, जल-संस्कृति और मंदिर वास्तुकला की अनोखी दुनिया से परिचित कराती है। IndoUS Tribune की इस श्रृंखला का हमारा छठा पड़ाव एक बार फिर सिद्ध करता है कि भारत की आध्यात्मिक विरासत कितनी गहरी, विस्तृत और चमत्कारों से भरी हुई है।
हम आशा करते हैं कि यह यात्रा आपके मन में भक्ति, शांति और भारतीय संस्कृति के प्रति प्रेम को और गहरा करेगी।
अब हमारी श्रृंखला का अगला पड़ाव होगा —
Draksharamam Temple (East Godavari)
जो पंचाराम क्षेत्रों में से एक है, जहाँ देवी माणिक्यम्बा और भगवान भीमेश्वर भक्तों पर अपना आशीर्वाद बरसाते हैं।
अगले पड़ाव तक, भगवान महानंदीश्वर की कृपा आपके जीवन में शांति, बल और मंगल लेकर आए।