March 29, 2025
IndoUS Tribune की हरिद्वार के मंदिरों की यात्रा का चौथा पड़ाव: माया देवी मंदिर
Dharam Karam

IndoUS Tribune की हरिद्वार के मंदिरों की यात्रा का चौथा पड़ाव: माया देवी मंदिर

हरिद्वार, जिसे ‘धर्म द्वार’ कहा जाता है, हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र स्थानों में से एक है। यहां स्थित माया देवी
मंदिर न केवल श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है, बल्कि इसे हरिद्वार की अधिष्ठात्री देवी का सम्मान
भी प्राप्त है। IndoUS Tribune की हरिद्वार के मंदिरों की आध्यात्मिक यात्रा के चौथे पड़ाव पर हम आपको लेकर
आए हैं माया देवी मंदिर – वह दिव्य स्थान, जिसे शक्तिपीठों में गिना जाता है और जहां माता सती का हृदय और
नाभि गिरे थे। इस प्राचीन मंदिर की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महिमा को विस्तार से जानने के लिए पढ़ें
हमारा विशेष आलेख।

धर्म करम: हरिद्वार मंदिरों की यात्रा (चौथा पड़ाव – माया देवी मंदिर)

हरिद्वार की पावन भूमि पर स्थित माया देवी मंदिर एक प्राचीन सिद्धपीठ है, जो माँ माया देवी को समर्पित है।
यह मंदिर मनसा देवी और चंडी देवी मंदिर के साथ हरिद्वार के त्रिकोणीय सिद्धपीठों में शामिल है। धार्मिक
इतिहास के अनुसार, माया देवी हरिद्वार की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं और यहाँ दर्शन किए बिना हरिद्वार
यात्रा अधूरी मानी जाती है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह मंदिर अत्यंत शक्तिशाली है और यहाँ सच्चे मन से
माँगी गई मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

माया देवी मंदिर का धार्मिक महत्व

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता सती ने अपने पिता दक्ष द्वारा भगवान शिव के अपमान से व्यथित होकर
यज्ञ में स्वयं को अग्नि को समर्पित कर दिया था। जब भगवान शिव को इसका पता चला तो वे अत्यंत क्रोधित हुए
और माता सती के पार्थिव शरीर को लेकर ब्रह्मांड में विचरण करने लगे। भगवान विष्णु ने शिव के क्रोध को शांत
करने के लिए अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के टुकड़े कर दिए। यह माना जाता है कि माया देवी मंदिर
वही स्थान है जहाँ माता सती का नाभि और हृदय गिरा था, जिससे यह स्थान शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध हुआ।

इतिहास और मंदिर की संरचना

माया देवी मंदिर का इतिहास 11वीं शताब्दी तक जाता है। यह मंदिर उन कुछ प्राचीन मंदिरों में से एक है, जो
समय की परीक्षाओं को झेलते हुए आज भी अपनी दिव्यता को बनाए हुए हैं। मंदिर के गर्भगृह में माँ माया देवी
की तीन सिर और चार भुजाओं वाली दिव्य प्रतिमा विराजमान है। साथ ही, माँ काली और माँ कामाख्या की
मूर्तियाँ भी यहाँ स्थापित हैं।

सिद्धपीठ त्रिकोण और धार्मिक आस्था

माया देवी मंदिर हरिद्वार के प्रमुख सिद्धपीठों में से एक है, और मनसा देवी तथा चंडी देवी मंदिर के साथ
त्रिकोणीय शक्ति का निर्माण करता है। इन तीनों मंदिरों के दर्शन किए बिना हरिद्वार यात्रा को अधूरा माना जाता है। यही कारण है कि हरिद्वार आने वाले श्रद्धालु इन तीनों मंदिरों में जाकर माँ का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त करते हैं।

मंदिर में प्रमुख उत्सव और अनुष्ठान

माया देवी मंदिर में नवरात्रि का उत्सव विशेष धूमधाम से मनाया जाता है। इस दौरान हजारों भक्त यहाँ एकत्र
होकर माँ की आराधना करते हैं। इसके अलावा, विशेष पूजा, हवन और अभिषेक अनुष्ठान भी यहाँ आयोजित
किए जाते हैं।

कैसे पहुँचे माया देवी मंदिर?

यह मंदिर हर की पौड़ी से पूर्व दिशा में स्थित है और शहर के प्रमुख स्थानों से आसानी से पहुँचा जा सकता है।
* रेल मार्ग: हरिद्वार रेलवे स्टेशन से मात्र 1 किमी दूर।
* सड़क मार्ग: हरिद्वार बस स्टैंड से आसानी से ऑटो और टैक्सी उपलब्ध।
* वायुमार्ग: निकटतम हवाई अड्डा जॉली ग्रांट एयरपोर्ट (देहरादून) लगभग 35 किमी की दूरी पर स्थित है।
मंदिर के आसपास दर्शनीय स्थल

  1. हर की पौड़ी: माँ गंगा की भव्य आरती का दिव्य अनुभव लें।
  2. मनसा देवी मंदिर: माँ मनसा देवी के दर्शन के लिए रोपवे सुविधा उपलब्ध।
  3. चंडी देवी मंदिर: पहाड़ों पर स्थित इस मंदिर तक रोपवे या पैदल मार्ग से पहुँचा जा सकता है।

    निष्कर्ष

    हरिद्वार की आध्यात्मिक यात्रा माया देवी मंदिर के दर्शन के बिना अधूरी मानी जाती है। यह मंदिर शक्ति की
    दिव्यता और आस्था का प्रतीक है, जहाँ श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु माँ के चरणों में नतमस्तक होते
    हैं।

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