IndoUS Tribune : असम के मंदिरों की यात्रा — पाँचवाँ और अंतिम पड़ाव (नवग्रह मंदिर, गुवाहाटी)

IndoUS Tribune : असम के मंदिरों की यात्रा — पाँचवाँ और अंतिम पड़ाव (नवग्रह मंदिर, गुवाहाटी)

ताम्रेश्वरी मंदिर की रहस्यमयी शक्ति और पुराने इतिहास को देखने के बाद IndoUS Tribune की असम यात्रा अब अपने पाँचवें और अंतिम पड़ाव पर पहुँचती है। सदिया के ताम्रेश्वरी मंदिर ने हमें असम की पुरानी परंपराओं, शक्ति पूजा और जनजातीय संस्कृति की झलक दिखाई। अब हमारी यात्रा हमें गुवाहाटी के प्रसिद्ध नवग्रह मंदिर तक ले आती है, जहाँ आस्था, ज्योतिष और प्राचीन भारतीय ज्ञान का सुंदर मेल देखने को मिलता है।

हमारा अंतिम पड़ाव है गुवाहाटी की चित्राचल पहाड़ी पर बना प्राचीन नवग्रह मंदिर। यह मंदिर नौ ग्रहों को समर्पित है और हिंदू धर्म में इसका बहुत विशेष महत्व माना जाता है। पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर ब्रह्मपुत्र नदी और पूरे शहर का सुंदर दृश्य भी दिखाता है।

नवग्रह मंदिर का इतिहास

नवग्रह मंदिर असम के सबसे पुराने मंदिरों में से एक माना जाता है। कहा जाता है कि पुराने समय में गुवाहाटी को “प्राग्ज्योतिषपुर” कहा जाता था, जिसका अर्थ है “ज्योतिष का नगर।” मान्यता है कि इसी स्थान से पूर्वोत्तर भारत में ज्योतिष और ग्रहों के अध्ययन की शुरुआत हुई थी।

मौजूदा मंदिर का निर्माण 1752 में अहोम राजा राजेश्वर सिंह ने करवाया था। इससे पहले यहाँ एक पुराना पत्थर का मंदिर था, जो 1697 के बड़े भूकंप में टूट गया था। बाद में राजा ने इसका फिर से निर्माण कराया।

राजा राजेश्वर सिंह ने मंदिर के नीचे एक नौ कोनों वाला तालाब भी बनवाया था, जिसे आज “सिलपुखुरी” कहा जाता है। यह तालाब श्रद्धालुओं के लिए पानी का मुख्य स्रोत था।

मंदिर की खासियत

इस मंदिर में नौ ग्रहों की पूजा शिवलिंग के रूप में की जाती है। मंदिर के गर्भगृह में नौ शिवलिंग हैं, जो सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु का प्रतीक हैं।

बीच में रखा शिवलिंग सूर्य देव का प्रतीक माना जाता है और बाकी ग्रह उसके चारों ओर स्थापित हैं। हर शिवलिंग पर अलग रंग का कपड़ा चढ़ाया जाता है, जो उस ग्रह को दर्शाता है।

आस्था और पूजा

हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ नवग्रह शांति पूजा करवाने आते हैं। लोगों का विश्वास है कि इस पूजा से ग्रह दोष कम होते हैं और जीवन में सुख, शांति और सफलता मिलती है।

विशेष रूप से शनि, राहु और केतु से जुड़े दोषों की शांति के लिए लोग दूर-दूर से यहाँ आते हैं।

मंदिर में रोज पूजा, अभिषेक और वैदिक मंत्रों का पाठ होता है।

त्योहार और आयोजन

महाशिवरात्रि और शिव चतुर्दशी यहाँ के बड़े त्योहार हैं। इन दिनों मंदिर में हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

माघ और फाल्गुन संक्रांति के समय यहाँ तीन दिन का महायज्ञ भी किया जाता है।

असम के कई अन्य मंदिरों की तरह यहाँ पशु बलि की परंपरा नहीं है। श्रद्धालु केवल फल, मिठाई, अन्न और पूजा सामग्री चढ़ाते हैं।

मंदिर का वातावरण

नवग्रह मंदिर का लाल रंग का गुंबद बहुत आकर्षक दिखाई देता है। पहाड़ी पर बना यह मंदिर शांत और भक्तिमय माहौल से भरा रहता है।

सुबह और शाम की आरती के समय यहाँ का वातावरण बहुत सुंदर और मन को शांति देने वाला होता है। मंदिर से ब्रह्मपुत्र नदी और गुवाहाटी शहर का दृश्य भी बहुत मनमोहक लगता है।

असम यात्रा का समापन

IndoUS Tribune की असम मंदिर यात्रा का यह पाँचवाँ और अंतिम पड़ाव हमें यह सिखाता है कि असम केवल प्राकृतिक सुंदरता की भूमि नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति, शक्ति पूजा और प्राचीन भारतीय ज्ञान का भी महत्वपूर्ण केंद्र है।

कामाख्या मंदिर से शुरू हुई यह यात्रा उमानंद मंदिर, हयग्रीव माधव मंदिर, ताम्रेश्वरी मंदिर और अब नवग्रह मंदिर तक पहुँचकर पूरी होती है। इस यात्रा ने हमें असम की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने का अवसर दिया।

अब अगले सप्ताह IndoUS Tribune शुरू करेगा एक नई आध्यात्मिक यात्रा — “बिहार के मंदिरों की यात्रा” — जहाँ भारत की प्राचीन संस्कृति, इतिहास और भक्ति के नए अध्याय हमारा इंतजार कर रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *